श्रीमद्भगवद्गीता
– अध्याय
11 (विश्वरूप
दर्शन
योग),
श्लोक
50
संजय उवाच
इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा, स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः।
आश्वासयामास च भीतमेनं, भूत्वा
पुनः सौम्यवपुर्महात्मा॥
भावार्थ :
संजय कहते हैं: इस
प्रकार अर्जुन से कहकर श्रीकृष्ण ने अपना विराट
रूप समेटकर फिर से अपना
सौम्य (मनुष्य जैसा) रूप दिखाया और
भयभीत अर्जुन को शांत एवं
आश्वस्त किया।
🪔 पूजा सामग्री खरीदने के लिए नीचे क्लिक करें
✉️ SriradheKrishnMandir@gmail.com 🌐 www.sriradhekrishnmandir.info

0 Comments