अन्ये त्वेवमजानन्तः श्रुत्वान्येभ्य उपासते ।
तेऽपि चातितरन्त्येव मृत्युं श्रुतिपरायणाः ॥ 25 ॥
शब्दार्थ
अन्ये — अन्य लोग तु — किन्तु एवम् — इस प्रकार अजानन्तः — न जानने वाले श्रुत्वा — सुनकर
अन्येभ्यः — अन्य ज्ञानी पुरुषों से उपासते — उपासना करते हैं ते अपि — वे भी च — और
अतितरन्ति — पार कर जाते हैं एव — निश्चय ही मृत्युम् — जन्म-मृत्यु रूपी संसार को श्रुतिपरायणाः — श्रवण में तत्पर रहने वाले, श्रद्धापूर्वक सुनने वाले
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, हर कोई आत्मा और परमात्मा के रहस्यों को खुद समझ नहीं पाता. कुछ लोग संतों और गुरुजनों से सुनकर, पूरी श्रद्धा के साथ भगवान की उपासना शुरू करते हैं. ऐसा करने वाले भक्त भी जन्म-मृत्यु के बंधन से निकलकर परम सुख पा लेते हैं.
इस श्लोक में भक्ति और सत्संग की ताकत बड़ी खूबसूरती से बताई गई है. हर इंसान के पास एक जैसी बुद्धि या अभ्यास की क्षमता नहीं होती — कोई वेद-शास्त्र पढ़ लेता है, कोई ध्यानयोग में माहिर हो जाता है, तो कोई ज्ञानयोग के जरिए आत्मा का अनुभव करता है. लेकिन कई लोग हैं, जिनके लिए ये सारे गहरे विषय ज़रा मुश्किल लगते हैं.
श्रीकृष्ण साफ कहते हैं कि ऐसे लोगों को मायूस होने की जरूरत नहीं. अगर वे किसी सच्चे गुरु, संत या भगवान के भक्त से ज्ञान सुनते हैं और श्रद्धा के साथ भगवान की भक्ति करते हैं, तो वही परम लक्ष्य हासिल कर सकते हैं, जो बड़े-बड़े योगी और ज्ञानी पाते हैं.
यहाँ श्रवण भक्ति की महिमा है — भक्ति के नौ रूपों में सबसे पहले आता है 'सुनना'. जब कोई भगवान के नाम, रूप, गुण, लीला और महिमा सुनता है, तो उसका दिल धीरे-धीरे साफ होने लगता है. धीरे-धीरे अज्ञान मिटता है और भगवान के लिए प्यार जागता है.
जैसे बीज को उगने के लिए पानी चाहिए, वैसे ही भक्ति के बीज को बढ़ाने के लिए सत्संग और भगवान की कथाएँ सुनना जरूरी है. जो रोज गीता, भागवत, रामायण या संतों की बातें सुनता है, उसके भीतर आध्यात्मिक चेतना पनपने लगती है.
श्रीकृष्ण यह भी बताते हैं, मुक्ति सिर्फ कठोर तप, योग या विद्वता से नहीं मिलती. अगर कोई पूरे दिल से श्रद्धा के साथ भगवान की कथा सुनता है और भगवान की शरण में आता है, तो वो भी जन्म-मृत्यु के चक्र से निकल सकता है. भगवान की कृपा पाने के लिए एक बात सबसे ज़रूरी है — सच्ची श्रद्धा, भक्ति और समर्पण.
ये श्लोक उन भक्तों के लिए उम्मीद है जो खुद को बड़ा ज्ञानी नहीं मानते. भगवान कभी नहीं देखता कि किसने कितना पढ़ा है; वो सिर्फ दिल में प्यार और श्रद्धा देखता है.
एक साधारण भक्त, जो प्रेम से संतों की कथा सुनता है, भगवान का नाम जपता है, और स्मरण करता है — वो भी भगवान का प्रिय बन जाता है. भगवान की कथा और नाम में इतनी ताकत है, कि वो दिल को शुद्ध करके परमात्मा के चरणों तक पहुँचा देते हैं.
जब कोई श्रद्धा से भगवान की लीला सुनता है, उसका मन धीरे-धीरे दुनिया के झंझटों से हटकर भगवान में लगने लगता है. तब उसके जीवन में शांति, संतोष और आनंद आने लगता है. आखिर में वही भक्ति उसे जन्म-मृत्यु के डर से निकाल कर, भगवान के धाम तक पहुँचा देती है.
जीवन से जुड़ी बातें:
1. भगवान सिर्फ विद्वानों के नहीं, बल्कि श्रद्धालु भक्तों के भी हैं.
2. सत्संग और भगवान की कथा सुनना बहुत जरूरी साधना है.
3. गुरु या संतों की बातें श्रद्धा से सुनने से आत्मिक उन्नति होती है.
4. भगवान का नाम, कथा और कीर्तन मन के विकार दूर करते हैं.
5. सच्ची श्रद्धा और भक्ति से कोई भी परम कल्याण पा सकता है.
आज का विचार:
अगर हम रोज़ कुछ समय भगवान की कथा सुनने, गीता पढ़ने और श्रीहरि के नाम का स्मरण करने में लगाएँ, तो हमारा जीवन धीरे-धीरे नई दिशा में बढ़ेगा. श्रीकृष्ण का वचन हमें भरोसा देता है — जो भक्त श्रद्धापूर्वक भगवान की महिमा सुनता है, और मन भगवान के चरणों में लगाता है, वो निश्चित रूप से जीवन के संघर्ष के सागर को पार कर लेता है.
हरिः ॐ तत्सत्
जय श्री राधे-कृष्ण 🚩🙏🌹
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The sacred construction work of Sri Radhe Krishna Mandir is continuously progressing by the divine grace of the Lord.
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“Every contribution towards temple construction is a blessed opportunity to serve the Lord.”

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Jai Guru Dev 🚩🚩🚩🚩🚩🙏🙏🙏🙏🙏💕💕💕💕💕💕
ReplyDelete🙏🙏🙏 JAI SHREE KRISHNA
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