Header Ads Widget

Responsive Advertisement

Bhagavad Gita के अध्याय 13, श्लोक 7

शब्दार्थ (Word Meaning)

अमानित्वम् → मान (अहंकार) का अभाव 

अदम्भित्वम् → दिखावा न करना 

अहिंसा → किसी को कष्ट न देना 

क्षान्ति → सहनशीलता 

आर्जवम् → सरलता (सीधापन) 

आचार्य-उपासनम् → गुरु की सेवा और श्रद्धा 

शौचम् → बाहरी और अंदर की शुद्धि 

स्थैर्यम् → स्थिरता (मन-बुद्धि की) 

आत्म-विनिग्रहः → इंद्रियों को वश में रखना 


अर्थ (Easy Meaning):

मनुष्य में अहंकार न हो, वह दिखावा न करे, किसी को कष्ट न दे, अपमान सह सके, उसका स्वभाव सीधा और सरल हो, वह गुरु की सेवा करे, शरीर और मन से शुद्ध रहे, उसका मन स्थिर हो,और वह अपनी इंद्रियों को नियंत्रण में रखे —ये सब ज्ञान के लक्षण हैं।


स्वामी रामसुखदास जी का भाव: रामसुखदास जी कहते हैं —

ये सभी गुण ही असली ज्ञान हैं। केवल शास्त्र पढ़ लेना ज्ञान नहीं है, बल्कि जीवन में इन गुणों का आना ही सच्चा ज्ञान है।


सार (Conclusion):

ज्ञान = अच्छे गुणों का जीवन में आना

अहंकार, दिखावा और चंचलता छोड़ना ही ज्ञान की शुरुआत है

Post a Comment

0 Comments